Raid on the house of clerk

04.08.2022

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल में स्वास्थ्य विभाग (health department) के क्लर्क हीरो केसवानी के घर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) का छापा पड़ा है. बताया जा रहा है कि इस क्लर्क के घर से अस्सी लाख की रकम नगद मिली है. छापे के बाद 54 वर्षीय हीरो केसवानी ने फिनायल पी लिया. उसे हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है. वहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है.क्लर्क हीरो केसवानी सतपुड़ा भवन में पदस्थ है. आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर EOW ने कोर्ट से ऑर्डर लेने के बाद उसके घर पर छापा मारा है. अब तक की जांच में टीम को अस्सी लाख का कैश और प्रॉपर्टी के दस्तावेज मिले हैं. कारवाई अभी जारी है.वरिष्ठ लिपिक हीरो केसवानी का घर भोपाल के उपनगरीय क्षेत्र बैरागढ़ में है. इसी घर में आय से अधिक संपत्ति के मामले में छापा मारा गया. छापे की कार्रवाई से बचने के लिए लिपिक ने घर में रखा फिनाइल पी लिया जिसके बाद उसे तुरंत हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहां उसका इलाज चल रहा है.भोपाल ईओडब्ल्यू के पुलिस अधीक्षक राजेश मिश्रा ने समाचार एजेंसी भाषा को बताया, ‘‘आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर वरिष्ठ लिपिक हीरो केसवानी के आवास पर छापा मारा गया है.” उन्होंने कहा कि छापे की कार्रवाई फिलहाल जारी है इसलिए कुल कितनी संपत्ति का खुलासा हुआ है इसका मूल्यांकन कार्रवाई समाप्त होने के बाद किया जा सकेगा.उन्होंने बताया कि सुबह केसवानी ने छापे के कार्रवाई का विरोध करते हुए दल के सदस्यों के साथ हाथापाई की और बाद में घर में रखा फिनाइल जैसा द्रव पी लिया. इसके बाद उल्टी होने पर उसे शासकीय हमीदिया अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है.राजेश मिश्रा ने कहा कि शुरुआती तौर जांच में लिपिक के घर से कुल चार करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति होने का अनुमान है. ईओडब्ल्यू अधिकारी ने कहा कि केसवानी का एक पेंटहाउस वाला आवासीय घर और उसमें महंगा सजावटी सामान भी पाया गया. इस मकान की कीमत लगभग डेढ़ करोड़ रुपये है.अधिकारी ने कहा कि लाखों की राशि केसवानी के परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में जमा पाई गई और अधिकांश संपत्ति उसने अपनी पत्नी के नाम पर खरीदी. उसकी पत्नी एक गृहिणी है और उसके पास आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है.

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Swine flu in chhattisgarh

कोरोना और मंकीपॉक्स को लेकर आ रही खबरों के बीच छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू की दस्तक ने लोगों की नींद उड़ा दी है।स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने बताया अब तक प्रदेश में स्वाइन फ्लू के 11 मरीज मिल चुके हैं. इनमें से दो मरीजों को डिस्चार्ज किया जा चुका है, वहीं 9 मरीजों का इलाज जारी है।
बरसात में लगातार होने वाले मौसमी बदलाव के कारण कई तरह की संक्रमणजनित बीमारियां होती हैं, इससे बचने और सावधान रहने की जरूरत है. इसके मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को मंकी-पॉक्स, कोविड-19 और स्वाइन फ्लू के साथ मौसमी बीमारियों से सावधान और सचेत रहने की अपील की है। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों और सिविल सर्जन्स को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। इसके साथ ही सभी जिलों में अलर्ट भी जारी किया गया है।स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने बताया कि छत्तीसगढ़ में मंकी-पॉक्स का एक संदिग्ध प्रकरण सामने आया था, जांच के बाद उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई है‌. देश के दूसरे हिस्सों में मंकी-पॉक्स के आठ मामले आए हैं, इसलिए पर्याप्त सावधानी बरतने की जरूरत है।उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वाइन फ्लू के 11 प्रकरणों की पहचान हुई है, जिनमें से दो मरीज इलाज के बाद स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौट चुके हैं।शेष नौ मरीजों का रायपुर के निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है।स्वाइन फ्लू के इन मामलों को संज्ञान में लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कि

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Diarrhoea in bhilai

भिलाई के स्मृति नगर स्थित स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट के हॉस्टल में फैला डायरिया जानलेवा होने लगा है। उल्टी-दस्त से पीड़ित होने की वजह से रविवार को परिजन के साथ गृह जिले बालोद गई छात्रा ने वहीं दम तोड़ दिया है। 39 छात्र-छात्राओं को नजदीक के निजी अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा है।उनमें से 23 अब भी भर्ती हैं। डाक्टरों ने उनकी हालत फिलहाल सामान्य बताई है। छात्रा की मौत के बाद हेल्थ एंड फूड सेफ्टी की टीम ने जांच शुरू कर दी है। फूड एंड सेफ्टी टीम ने सोमवार को हॉस्टल का जायजा लिया और खाने-पीने के इंतजाम तथा हाईजीन पर फोकस किया है। टीम ने रिपोर्ट अभी अफसरों को नहीं सौंपी।जिस हॉस्टल में डायरिया फैला, उसका संचालन रस्तोगी नर्सिंग कॉलेज की समिति करती है। हॉस्टल में 625 छात्र-छात्राएं हैं, जिनका भोजन मेस में तैयार होता है। भिलाई-दुर्ग में हफ्तेभर पहले तक भारी बारिश हुई।डायरिया की शिकायत इसी दौर में शुरू हुई और चार-पांच दिन के भीतर छात्र-छात्राओं को उल्टी-दस्त के साथ-साथ तेज पेट दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती किया जाने लगा। कामिनी नाम की जिस छात्रा ने बालोद में दम तोड़ा, वह भी अस्पताल में भर्ती थी। देखभाल के लिए परिजन उसे एक दिन पहले ही घर ले गए थे।

किचन में नाली का पानी, नमी में रखे फूड पैकेट और पीने का पानी वजह
1 मेस के किचन के पीछे निगम की गंदी नाली थी। बताया गया कि तेज बारिश में इसका पानी किचन में घुस गया था।

2 जिस जगह 6 सौ से ज्यादा बच्चों के फूड पैकेट रखे जाते हैं, वहां बारिश के कारण काफी नमी पाई गई।

3 निगम के पानी के बजाय अपने स्रोत का पानी उपयोग कर रहे हैं। इतने छात्रों के लिए केवल एक ही आरओ लगा है।

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Doctors give a new life

जैसलमेर के खुहड़ी गांव के मेघसिंह को सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने नई जिंदगी दी है। अब वो इन डॉक्टरों को धन्यवाद देते नहीं थक रहा है। दरअसल, मेघ सिंह के साथ 17 जुलाई को एक बड़ा हादसा हुआ। रात को अपनी बाइक पर खेत में जाते समय खेत की कंटीली तारबंदी से उसका गला कट गया। परिजन उसे तुरंत जवाहिर अस्पताल लाए, जहां युवा सर्जन डॉ. सत्ताराम और उनकी टीम ने अलसुबह मरीज की हालत को देखते हुए ऑपरेशन किया। करीब 3 घंटे चले ऑपरेशन से मेघ सिंह को नई जिंदगी मिल गई। आज वो बिलकुल ठीक हो गया है और सरकारी अस्पताल को धन्यवाद देते नहीं थक रहा है।मेघसिंह का कहना है कि जैसलमेर का जवाहिर अस्पताल रेफर अस्पताल के नाम से फेमस है। यहां हर मरीज को गंभीर अवस्था में रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में कई मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। अब इस अस्पताल में डॉक्टरों ने जटिल से जटिल ऑपरेशन खुद करके मरीजों और यहां के लोगों में एक भरोसा पैदा किया है कि सरकारी अस्पताल अब लोगों को नई जिंदगी देने लगे हैं।
डॉक्टर बोले, काफी क्रिटिकल कंडीशन थी
जवाहिर अस्पताल के डॉ. सत्ता राम का कहना है कि मेघ सिंह बहुत ही क्रिटिकल कंडीशन में हमारे पास आया था। उसकी गर्दन की सब मांसपेशिया कट चुकी थी। इसके साथ ही उसकी सांस की नली में पंचर था। थायराइड ग्रंथि में भी डेमेज था और क्रिकोइड कार्टिलेज भी फेक्चर थी। ऐसे में अगर उसको तुरंत इलाज नहीं मिलता तो उसकी जान जा सकती थी। लकवा मार सकता था या जिंदगी भर बेड पर ही बिताता। इतनी गंभीर स्थिति देखते हुए हमने खुद मेघ सिंह का ऑपरेशन करने की ठान ली।

3 घंटे तक चला ऑपरेशन
अस्पताल की टीम में हरीश जांगीड़, झाबरमल, लक्ष्मीनारायण ने सुबह 4 बजे ऑपरेशन शुरू किया और लगातार 3 घंटे के जटिल ऑपरेशन के बाद उसकी जान बचा ली। उन्होंने बताया कि अब मरीज बिलकुल ठीक है। चल फिर रहा है बोल रहा है। डॉ. सत्ताराम ने कहा कि लोगों को अब सरकारी अस्पताल में सारी सुविधा मिल रही है और वो भी एक दम नि:शुल्क। अब रेफर अस्पताल के नाम से फेमस जवाहिर में अब हाइटेक ऑपरेशन की सुविधा मिलने और निशुल्क मिलने से लोगों का सरकारी अस्पताल की तरफ दुबारा रुझान बढ़ने लगा है।

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Patients with skin diseases in hospitals

बारिश की वजह से बड़ी संख्या में लोग चर्म रोग से पीड़ित हो रहे हैं। अस्पतालों के साथ ही क्लिनिकों में मरीजों की संख्या 20 से 30 फीसदी तक बढ़ गई है। पीएमसीएच में इन दिनों सबसे अधिक मरीज चर्म रोग विभाग की ओपीडी में ही आ रहे हैं।
सोमवार को 421 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन कराया। इनमें 220 पुरुष, 157 महिलाएं और 44 बच्चे थे। ये सभी चर्म रोग से पीड़ित हैं। डॉ. अभिषेक कुमार झा ने कहा कि चर्म रोग विभाग में भीड़ तो हर मौसम में रहती है, पर बरसात में बढ़ जाती है। अभी मरीजों की संख्या 30 फीसदी बढ़ गई है।अन्य मौसम में ओपीडी में 350 मरीज रजिस्ट्रेशन कराते हैं। अभी 400 से 500 मरीज प्रतिदिन रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। वहीं आईजीआईएमएस के चर्म रोग विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन 80 से 100 मरीज आ रहे हैं।

मरीजों को ये समस्या
इस समय मरीजों को समर ब्वायल्स, दिनाएं, चिकनपॉक्स, शरीर में दाने, शरीर निकलने वाले दाने में पानी, फंगल इनफेक्शन, खुजली, काछ लगने, हाथ-पैर की अंगुलियों पानी निकलने की समस्या हो रही है। हालांकि इस मौसम में जलजनित चर्म रोग पीड़ितों की संख्या ब

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Depression distrub the doctors

मध्यप्रदेश में आठ दिन में दो डॉक्टर अपनी जान दे चुके हैं। दोनों में कारण डिप्रेशन है। एक्सपर्ट का मानना है कि कोविड के बाद से डॉक्टर डिप्रेशन में हैं। मेडिकल कॉलेजों में काउंसलर्स रखने की जरूरत है, जिससे मेडिकल स्टूडेंट्स और डॉक्टरों को तनाव से राहत मिल सके। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 80% डॉक्टर मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं।भोपाल AIIMS में MBBS की सेकंड ईयर की स्टूडेंट मारिया मथाई ने रविवार को हॉस्टल की तीसरी मंजिल से कूदकर जान दे दी। वह केरल की रहने वाली थी और टॉपर थी। उसे स्कॉलरशिप भी मिली थी। मारिया के पिता ने बताया कि वह पिछले 2 महीनों से पढ़ाई को लेकर परेशान थी। पुलिस ने भी शुरुआती जांच में मौत की वजह डिप्रेशन बताई है।

इंदौर में मेडिकल स्टूडेंट ने लगाई फांसी

आठ दिन पहले इंदौर के एमवाय अस्पताल की जूनियर डॉक्टर अपूर्वा गुलानी ने सुसाइड कर लिया था। वह 3 साल से मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के साथ इंटर्नशिप कर रही थी। मौके से सुसाइड नोट भी मिला। इसमें जिंदगी से हारने की बात लिखी है। दोस्तों के मुताबिक वह कई दिन से डिप्रेशन में थी। वह मूल रूप से जबलपुर के नजदीक लखनादौन (सिवनी) की रहने वाली थी। माना जा रहा है कि उसने एनेस्थीसिया का ओवरडोज लिया था।

देशभर में डिप्रेशन में हैं 80% डॉक्टर्स

IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 80% डॉक्टर्स ज्यादा काम की वजह से डिप्रेशन में हैं या मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। 56% डॉक्टर्स को 7 घंटे की नींद भी नसीब नहीं होती। ऐसे में डॉक्टर्स और मेडिकल स्टूडेंट्स की मेंटल हेल्थ पर खतरनाक असर पड़ रहा है।नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन ने मेडिकल स्टूडेंट्स, रेसीडेंट्स और डॉक्टर्स पर रिसर्च की। इसके मुताबिक पिछले 10 साल में (2010-2019) तक 358 डॉक्टर्स ने सुसाइड किया है। इनमें 125 मेडिकल स्टूडेंट्स हैं, जबकि 105 रेसिडेंट डॉक्टर्स और 128 डॉक्टर्स ने मौत को गले लगाया है। ये रिपोर्ट हाल में जारी की गई है। रिसर्च में ये भी सामने आया कि 10 में से 7 सुसाइड केस ऐसे थे, जिनमें सुसाइड करने वाले डॉक्टर्स की उम्र 30 से कम थी।

एक्सपर्ट व्यू… खुलकर बातचीत करने से मिलेगा हल: डॉ. शोभना

BHU के साइकोलॉजी डिपार्टमेंट में प्रोफेसर और यूनिवर्सिटी स्ट्रेस मैनेजमेंट सेल में काउंसलर डॉ. शोभना ने डिप्रेशन को गंभीर समस्या बताया। उन्होंने बताया कि घर से लेकर स्कूल, कॉलेज और ऑफिस सभी जगह इसका असर देखने को मिल रहा है। खासकर युवाओं में डिप्रेशन सबसे ज्यादा हावी है। कई बार लगातार निगेटिव कमेंट्स या स्ट्रेस के कारण पर्सनालिटी प्रीडिस्पोजिशन होता है। इसका मतलब ये है कि जरा सी परेशानी उनमें एंग्जायटी ट्रिगर कर सकती है, जो सुसाइड का कारण बन सकती है।समाधान का जिक्र करते हुए डॉ. शोभना ने बताया कि मेडिकल फैकल्टी और स्टूडेंट्स के लिए हर सेक्शन में मेडिकल काउंसलर्स का होना जरूरी है, ताकि टीचर्स और स्टूडेंट्स परेशानी को खुलकर साझा कर सकें। डिजिटल युग में पेरेंट्स और बच्चों के बीच बातचीत जरूरी है।

योग और मोटिवेशनल सेशन पर जोर

भोपाल AIIMS के पीआरओ मयंक कपूर ने बताया कि स्टूडेंट्स की मेंटल हेल्थ को ध्यान में रखते हुए योग और मेडिटेशन प्रोग्राम किए जा रहे हैं। इसके अलावा, मोटिवेशनल सेशन पर भी फोकस किया जा रहा है। साथ ही, जीनोम सीक्वेंसिंग की मदद से डिप्रेशन और इसके समाधान पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह प्रोग्राम सभी लोगों के लिए होगा। इससे हर वर्ग को भी फायदा होगा। हाल में AIIMS भोपाल को नेशनल हेल्थ मिशन और हेल्थ डिपार्टमेंट के साथ मिलकर डिप्रेशन पर जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए फंडिंग की गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे मरीज को दवाइयों, काउंसलिंग के साथ स्पेसिफिक इलाज देने में मदद मिलेगी।

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Death of Monkeypox infected in kerala

भारत में मंकीपॉक्स के अब तक 5 केस दर्ज हो चुके हैं। कर्नाटक की हेल्थ मिनिस्टर वीना जॉर्ज ने कंफर्म कर दिया है कि केरल में मंकीपॉक्स से एक मौत हो गई है। मृतक की उम्र 22 साल थी, वो UAE से अपने घर लौटा था। UAE से निकलने के एक दिन पहले ही उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी।
मंकीपॉक्स को अब तक लोग सीरियस नहीं ले रहे हैं। देश में हुई पहली मौत के बाद इसको लेकर किस तरह सचेत होने की जरूरत है। मंकीपॉक्स से मौत की कितनी संभावना है ये सब जानेंगे डॉ. प्रभाकर तिवारी, इन्फॉर्मेशन एक्सपर्ट्स, CMHO भोपाल और डॉ. आर वी एस भल्ला, डायरेक्टर इंटरनल मेडिसिन, फोर्टिस अस्पताल से।

मंकीपॉक्स से बचाव के लिए हेल्थ मिनिस्ट्री की ये हैं 8 गाइडलाइन

सभी हेल्थ सेंटर्स ऐसे लोगों पर कड़ी नजर रखें, जिनके शरीर पर दाने दिखते हैं।
उन पर नजर रखें, जिन्होंने पिछले 21 दिनों में मंकीपॉक्स सस्पेक्टेड देशों की यात्रा की हो।
संदिग्ध केस को हेल्थकेयर फैसिलिटी में आइसोलेट किया जाएगा, जब तक मरीज के शरीर में दानों से पपड़ी नहीं उधड़ जाती।
मंकीपॉक्स संदिग्ध मरीजों के फ्लूइड या खून का सैंपल NIV पुणे में टेस्ट के लिए भेजा जाएगा।
अगर कोई पॉजिटिव केस पाया जाता है, तो फौरन कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू की जाएगी।
विदेश से आने वाले यात्रियों को ऐसे लोगों के संपर्क में आने से बचना चाहिए, जो स्किन की बीमारी से पीड़ित हों।
यात्रियों को चूहे, गिलहरी, बंदर सहित जिंदा और मरे हुए जंगली जानवरों के संपर्क में भी नहीं आना चाहिए।
अफ्रीकी जंगली जानवरों से बनाए गए प्रोडक्ट्स जैसे- क्रीम, लोशन और पाउडर का इस्तेमाल करने से बचें।
WHO पहले से कहता आ रहा है कि समलैंगिक पुरुषों में मंकीपॉक्स के संक्रमण की ज्यादा संभावना है। या जिस पुरुष का संबंध दूसरे पुरुष से रहता है उन्हें मंकीपॉक्स होने का खतरा ज्यादा है। इस बात को लेकर LGBTQ कम्यूनिटी में हलचल थी। अब WHO ने नई हेल्थ एडवाइजरी जारी की है जिसमें कहा है कि यह ध्यान रखना जरूरी है कि मंकीपॉक्स का खतरा केवल पुरुषों के साथ यौन संबंध यानी सेक्स करने वाले पुरुषों तक ही सीमित नहीं है। कोई भी व्यक्ति, जो किसी संक्रमित व्यक्ति के कॉन्टैक्ट में है, उसे मंकीपॉक्स होने का खतरा ज्यादा है।

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install cctv in each medical college of up

उत्तर प्रदेश के हर मेडिकल कॉलेज को अपने यहां कम से कम 25 सीसीटीवी कैमरे लगवाने होंगे। इन कैमरों की डीवीआर भी सुरक्षित रखनी होगी। मान्यता की जांच के लिए आने वाली टीम अब सीसीटीवी कैमरे की भी निगरानी करेगी। इस संबंध में नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने निर्देश दिया है।प्रदेश में केजीएमयू, पीजीआई, लोहिया संस्थान सहित अन्य चिकित्सा संस्थानों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन कई मेडिकल कॉलेजों में अभी इसके पुख्ता इंतजाम नहीं हो सके हैं। प्रदेश में संचालित 13 राजकीय मेडिकल कॉलेजों और 14 स्वशासी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई चल रही है, जबकि 14 में अगले सत्र से पढ़ाई शुरू होगी। पुराने कॉलेजों में ज्यादातर जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन अब सभी कॉलेजों में इसे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।भेजे गए निर्देश में मुख्य द्वार पर एक, मरीज पंजीयन काउंटर पर दो, ओपीडी में पांच, ऑपरेशन थियेटर कॉम्प्लेक्स में दो, फैकल्टी लॉज में दो, लेक्चर थियेरट में पांच, एनॉटोमी हाल में एक, फिजियोलॉजी व बायो केमिस्ट्री लैब में दो-दो, पैथोलॉजी व माइक्रोबायोलॉजी लैब में दो-दो, फार्माकोलॉजी लैब में एक, तीमारदारों के वेटिंग एरिया में एक और इमरजेंसी वार्ड में एक सीसीटीवी कैमरा लगवाना अनिवार्य होगा।

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Corona in mp

मध्यप्रदेश में बीते 2 दिन में कोरोना से 4 मौतें रिपोर्ट हुई हैं। वहीं इस महीने अबतक प्रदेश में कुल 14 मौतें दर्ज हुई हैं। जो कि जून मुकाबले 5 ज्यादा है। संक्रमण की स्पीड भी जून के मुकाबले डबल हो चुकी है। जून में 1878 संक्रमित मिले थे। जुलाई में अबतक 5380 मरीज मिल चुके हैं। इनमें आधे तो इंदौर से हैं, भोपाल की स्थिति भी चिंताजनक है।थर्ड वेव गुजरने के बाद मार्च से मई तक तीन महीनों में एक-एक मरीज की मौत हुई, लेकिन जून में मौत के मामले बढ़ने लगे। सिर्फ तीन शहरों जबलपुर, इंदौर और भोपाल में जून के महीने में 9 मरीजों की मौत हो गई। जून से संक्रमण ने रफ्तार पकड़ी और कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या भी बढ़ गई। इस महीने में ही प्रदेश में अबतक 10 मरीज दम तोड़ चुके हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग मरीजों की मौत को एक से दो हफ्ते बाद दर्ज कर रहा है।

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Uproar in doctors meeting

राजधानी भोपाल में जुटे प्रदेश के सरकारी डॉक्टरों की बैठक में विवाद हो गया है। भोपाल के मानस भवन में मप्र मेडिकल ऑफीसर्स एसोसिएशन की साधारण सभा की बैठक में शामिल होने के लिए प्रदेश भर के डॉक्टरों को बुलाया गया था। लेकिन यहां बैठक में एसोसिएशन की राज्य इकाई के चुनाव की चर्चा शुरू हो गई। डॉक्टरों ने अलग- अलग गुटों के साथ अध्यक्ष बनने के लिए लॉबिंग शुरू कर दी। बैठक में अचानक चुनाव की तैयारी को देख डॉक्टर भड़क गए। बैठक के दौरान जमकर नारेबाजी हुई। अधिवेशन में दो हजार से ज्यादा डॉक्टर भोपाल पहुंचे हैं।

मंच से बोले डॉक्टर- हमें दमदार नेतृत्व चाहिए डरपोक नहीं

भोपाल के मानस भवन में आयोजित मप्र मेडकिल ऑफीसर्स एसोसिएशन के प्रांतीय अधिवेशन में मंच पर डॉक्टरों ने जमकर भड़ास निकाली। अलग-अलग जिलों से आए डॉक्टरों ने मंच से कहा हमें ऐसी लीडरशिप नहीं चाहिए जो संकट के समय डॉक्टरों का साथ छोड़कर राजनेताओं और अफसरों के दबाव में हमें ही दबाकर राजीनामा कराने लगे। दिन-रात अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों के लिए डटे रहने वाले डॉक्टर के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार की घटनाएं हों या प्रशासन के मनमाने गलत आदेश। हमें आदेश मानने के लिए सहमत करने के बजाए दमदारी से सरकार और प्रशासन के सामने रखने का साहस करने वाला डॉक्टर हमारी लीडरशिप करें।

विभाग की मनमानी से नौकरी छोड़ रहे डॉक्टर

दमोह से आए डॉक्टर दिवाकर पटेल ने कहा कि हमारी एमपीएमए की जनरल बॉडी की मीटिंग के लिए बुलाया गया था। रही है। डॉक्टरों की कई समस्याएं हैं। अभी स्वास्थ्य विभाग पूर्व से कार्यरत डॉक्टरों को छोड़कर अपने जान-पहचान वाले नए डॉक्टरों को डायरेक्ट क्लास वन डॉक्टर बनाने के लिए 25 प्रतिशत सीधी भर्ती से उन्हें नौकरी में लाने का प्रयास कर रहा है। जबकि वर्तमान में कई विशेषज्ञ चिकित्सक प्रदेश भर में कार्यरत हैं। इन क्लास 2 मेडिकल ऑफीसर्स को प्रमोट किया जाए तो वे विशेषज्ञ के तौर पर काम कर सकते हैं। ऐसे ही कई मनमाने फैसले लिए जा रहे हैं। इससे डॉक्टर सरकारी नौकरी छोड़कर जा रहे हैं। इससे मरीजों का नुकसान हो रहा है।

बुलाया अधिवेशन में कराने लगे चुनाव

डॉ.दिवाकर पटेल ने कहा कि आज की जनरल बॉडी मीटिंग की पूर्व नियोजित प्रक्रिया में चुनाव का कोई प्रावधान नहीं था लेकिन यहां अचानक चुनाव की बात आने लगी। असंवैधानिक तरीके से चुनाव कराने की कोशिश हो रही है। इसका हम लोग विरोध कर रहे हैं। हम नहीं चाहते कि ऐसे लोग एसोसिएशन में पदों पर बिठाए जाएं जिनके नाम पहले से तय किए गए हों। चुनाव संवैधानिक तरीके से पूरी प्रक्रिया के साथ होने चाहिए।

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