black earning clerk suspended

06.08.2022

काली कमाई का सौदागर चिकित्सा शिक्षा विभाग का क्लर्क हीरो केशवानी को सस्पेंड कर दिया गया है। उसके खिलाफ डिपार्टमेंटल जांच भी शुरू हो गई है। वे पिछले 20 साल से चिकित्सा शिक्षा विभाग में पदस्थ था।बता दें कि ईओडब्ल्यू (Eow) की कार्रवाई से बचने क्लर्क हीरो केशवानी ने फिनाइल पी लिया था। वहीं ईओडब्ल्यू (Eow) टीम की जांच में परिवार के लोग सहयोग नहीं कर रहे है। ईओडब्ल्यू की कार्रवाई में अब तक दो बैंक खाते मिले है। हीरो केशवानी गोल्ड और महंगे सूट पहनने का शौकीन है बड़ी-बड़ी पार्टियों में अधिकारियों की तरह पहुंचता हीरो था। ऑफिस और पार्टियों में बदल-बदल कर कार का उपयोग करता था।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Allegation of disturbace in tender

पाली के संवेदक भोमेश्वर थानवी ने मेडिकल कॉलेज में करीब एक करोड़ के फर्नीचर खरीद के टेंडर जारी करने में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। थानवी का कहना है कि निविदा छोड़ने में नियमों को ताक पर रखा गया।उन्होंने कॉलेज के प्रिंसिपल को पत्र लिखकर गुड़गांव की एक कम्पनी के जयपुर डीलर पर मिलीभगत व विभाग के साथ धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि निविदा की शर्तों में आओटा (आल इंडिया ओकोपेशनल थेरेपिस्ट एसोसिएशन) सटिर्फिकेट की अनिवार्यता की गई, जो कि नहीं था। वेबसाइड की सूची के अनुसार गुड़गांव के आओटा सर्टिफिकेट के आधार पर निविदा भरी है,जबकि गुडगांव का माल दिया ही नहीं है। थानवी का आरोप है कि फर्नीचर खरीद में सारे नियमों की अवहेलना करके 12 में से 11 फर्मो के आवेदन निरस्त कर एक को आदेश दे दिया, जबकि अभी तक माल भी नहीं आया। उनका आरोप है कि गुड़गांव की कम्पनी का जयपुर में कोई डीलर नहीं है।फर्नीचर खरीद में जिला उद्योग केंद्र के प्रतिनिधि को भी शामिल किया जाना था, मगर उन्हें भी नहीं लिया गया। इस निविदा आदेश के बारे में जानकारी लेने के लिए आरटीआई के तहत मांगी गई, पर अभी कोई जानकारी नहीं दी है।इस बारे में पूर्व प्रिसिंपल डॉ. एमएम पुकार को फोन किया तो उन्होंने रिसीव नहीं किया, जबकि ये टेंडर उनके कार्यकाल में जारी किया गया था। नए प्रिसिंपल डॉ. बीएल बिनावरा ने कहा कि शुक्रवार को ज्वॉइन किया है। भोमेश्वर थानवी ने आरटीआई में जानकारी उपलब्ध नहीं करवाने की जानकारी दी। थानवी को जानकारी दी जाएगी। उन्होंने उनको शनिवार को बुलाया है।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

medical college suicide case

06.08.2022
इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट सुसाइड केस में पुलिस पैटर्न लॉक नहीं खोल पा रही है। सायबर एक्सपर्ट भी उसका लॉक खोलने में सफल नहीं हो सके। एसआईटी ने सुसाइड करने वाले स्टूडेंट का मोबाइल जब्त कर भोपाल स्थित सायबर ऑफिस भेजा था। पैटर्न लॉक नहीं खुलने से पुलिस को जांच की दिशा नहीं मिल पा रही है। इधर, ग्रामीण आईजी द्वारा बनाई गई एसआईटी में से डीसीपी का ट्रांसफर होने से भी जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। इस मामले में पकड़ाए दो छात्रों को भी कोर्ट से जमानत मिल गई है।
चेतन पाटीदार (22 वर्ष) पुत्र दिनेश पाटीदार निवासी ग्राम मौलाना जिला उज्जैन ने 31 मार्च को फांसी लगाकर अपनी जान दे दी थी। इस मामले में परिवार ने कालेज के डीन डॉ. जीएस पटेल और तृतीय वर्ष के दो छात्रों रोमिल सिंह व दुर्गेश हाड़ा, होशांक वर्मा और अर्पित हाड़ा पर आरोप लगाए थे। पुलिस ने इसमें से डीन डॉ. पटेल और रोमिल व दुर्गेश हाड़ा को आरोपी बनाकर केस दर्ज किया था। दोनों छात्रों की गिरफ्तारी हो गई थी। लेकिन डीन डॉ. जीएस पटेल को सबूत के अभाव में पूरे मामले की जांच करने पर गिरफ्तार करने की बात कही गई थी।

भोपाल में सायबर एक्सपर्ट नहीं खोल पाए पैटर्न लॉक
इंदौर से एसआईटी की टीम में एडिशनल डीसीपी शशिकांत कनकने, अनिल चौहान और राजीव त्रिपाठी मामले की जांच कर रहे थे। उन्होंने खुड़ैल पुलिस द्वारा जब्त चेतन का मोबाइल भोपाल सायबर ऑफिस भेजा था। यहां से भी मोबाइल बिना लॉक खुले वापस आ गया। एक्सर्ट उसका लॉक नहीं खोल पाए। इधर एसआईटी के एक अधिकारी अनिल चौहान का ट्रांसफर हो गया। जिसके कारण जांच रूक गई।

दोनों छात्रों को मिली जमानत
चेतन पाटीदार की मौत के मामले गिरफ्तार किये गए दोनों छात्र रोमिल और दुर्गेश को कोर्ट ने जमानत दे दी। परिवार के मुताबिक उनके दो बार एसआईटी की टीम ने बयान लिये हैं। अब मोबाइल बाहर के सायबर एक्सपर्ट के यहां भेजने की बात कही जा रही है।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Eight central pay commission

केंद्र सरकार ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर किए गए एक दावे से इनकार किया है जिसमें कहा गया था कि केंद्रीय कर्मियों व पेंशनरों के वेतन, भत्तों व पेंशन के संशोधन के लिए आठवें वेतन आयोग का गठन नहीं होगा. केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव अभी तक सामने नहीं आया है. चौधरी ने एक सवाल का जवाब में ये बातें कही हैं. सवाल पूछा गया था कि क्या यह सच है कि सरकार केंद्रीय कर्मियों व पेंशनरों के वेतन, भत्तों व पेंशन को रिवाइज करने के लिए आठवें वेतन आयोग का गठन नहीं करेगी?

इसलिए खड़ा हुआ था सवाल
चौधरी ने राज्यसभा को जानकारी दी कि सातवें वेतन आयोग के चेयरमैन ने सिफारिश की थी कि दस साल के लंबे समय का इंतजार किए बिना भी एक अवधि में पे मैट्रिक्स का रिव्यू किया जा सकता है. मंत्री ने कहा कि पे मैट्रिक्स को रिव्यू किया जा सकता है और Aykroyd formula के आधार पर इसे रिवाइज किया जा सकता है. इस फॉर्मूले में आम आदमी के इस्तेमाल में आने वाली चीजों के भाव में बदलाव को विचार में लिया जाता है जिसे शिमला की लेबर ब्यूरो समय-समय पर रिव्यू करती है. सातवें वेतन आयोग ने सुझाव दिया था कि मैट्रिक्स को समय-समय पर बिना वेतन आयोग का इंतजार किए संशोधित करने के लिए इस फॉर्मूले को आधार बनाया जाना चाहिए।

डीए/डीआर को लेकर मंत्री ने कही ये बात
सरकार से डीए/डीआर को लेकर भी एक सवाल पूछा गया था कि ऊंची थोक महंगाई दर के चलते क्या महंगाई भत्ता (डीयरनेस अलाउंस) और महंगाई राहत (डीयरनेस रिलीफ) को बढ़ाया जाएगा? इस पर चौधरी ने जवाब दिया कि इसकी जरूरत नहीं है क्योंकि डीए/डीआर ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रिलयल वर्कर्स (AICPI-IW) डेटा के आधार पर तय होता है. यह डेटा शिमला की लेबर ब्यूरो उपलब्ध कराती है. केंद्रीय कर्मी और पेंशनर्स डीए/डीआर दरों में बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे हैं.

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Orders for transfer and posting

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निर्माण केंद्र कर्मचारियों का पदस्थापन स्थानांतरण प्रशासनिक अति आवश्यकताओं को देखते हुए लोकहित में उनके नाम सन्मुख निम्नांकित स्थानों पर तुरंत प्रभाव से करने के दिए आदेश

OFFICIAL ORDE HERE

567 Dt.05.08.2022 Website

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

orders for medical institutions

आजादी के अमृत महोत्सव की श्रंखला में प्रदेश में 13 अगस्त से 16 अगस्त तक हर घर तिरंगा कार्यक्रम का आयोजन प्रदेश के चिकित्सा विभाग में व्यापक जन सहभागिता के साथ ऐतिहासिक स्वरूप देखकर आयोजन किए जाने के लिए दिशानिर्देश किए जारी।

ORDERS HERE

729 dt 05.08.2022

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Medical college principals order

राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी, जयपुर ने निम्नलिखित चिकित्सक शिक्षकों को उनके नाम के सम्मुख अंकित मेडिकल कॉलेजों में प्रधानाचार्य के पदों पर तुरंत प्रभाव से नियुक्त करने के दिए आदेश

OFFICIAL ORDERS HERE

Pmc order

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Ayushman scheme stopped in punjab

पंजाब में आयुष्मान भारत योजना का दिवाला निकल गया है. इस स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पंजाब सरकार सात महीने का बकाया 16 करोड़ पीजीआई चंडीगढ़ को नहीं दे सका. इस वजह से पीजीआई चंडीगढ़ ने पंजाब के मरीजों का इलाज बंद कर दिया है. पीजीआई पंजाब के 1200 से 1400 मरीजों का इस योजना के तहत इलाज करता है. द ट्रिब्यून के मुताबिक पंजाब के स्वास्थ्य सचिव अजय शर्मा ने कहा कि पीजीआई को एक हफ्ते में इसका भुगतान कर दिया जाएगा. अजय शर्मा ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार का 300 करोड़ रुपये बकाया है. मामला वित्त विभाग के पास है और उम्मीद है कि एक सप्ताह के भीतर बकाया भुगतान कर दिया जाएगा।

इन अस्पतालों का है बकाया
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल सेक्टर 32 ने इस साल मार्च से पंजाब के मरीजों का इलाज 2.3 करोड़ रुपये बकाया होने के बाद रोक दिया था. पंजाब सरकार पर इस योजना के तहत जीएमसीएच सेक्टर 32, जीएमएसएच सेक्टर 16 और चंडीगढ़ के निजी अस्पतालों का तीन करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है. आयुष्मान भारत सेहत बीमा योजना 20 अगस्त, 2019 को शुरू की गई थी. इस योजना को पंजाब की कम से कम 65 प्रतिशत आबादी को वित्तीय सहायता को तहत स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान किया जाता है. यह प्रति परिवार प्रति वर्ष पांच लाख रुपये का पात्रता-आधारित स्वास्थ्य बीमा कवर है.

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Pledge for improve health service

05.08.2022
स्वास्थ्य एक ऐसी आवश्यकता है जो हर मनुष्य के जीवन में प्राणवायु के समान मूल्यवान है. यही वजह है कि मध्यप्रदेश में भी स्वास्थ्य सेवा प्रदाय तंत्र को पिछले लगभग दो दशक में सुदृढ़ बनाया गया है. एक बार स्वास्थ्य सेवा प्रदाय तंत्र की आधारभूत संरचना स्थापित कर लेने के बाद इसके सम्यक्, सुचारू और निर्बाध संचालन की आवश्यकता होती है।देश की आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में मध्यप्रदेश सरकार ने इन्हीं बिंदुओं को ध्यान में रखकर स्वास्थ्य सेवाओं में सम्पूर्ण सुधार का संकल्प लिया है. नाम दिया है सम्पूर्ण कायाकल्प अभियान. इस अभियान में प्रदेश सरकार अपनी स्वास्थ्य संस्थाओं एवं सेवाओं को दुरुस्त बनाते हुए उनमें आवश्यक विस्तार भी करेगी. न सिर्फ़ नागरिकों के लिए शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं का वातावरण बदला जाएगा बल्कि अत्याधुनिक तकनीकों, चिकित्सा उपकरणों और अधोसंरचना के माध्यम से श्रेष्ठ स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क उपलब्ध करवाई जाएंगी.अभियान में प्रदेश की स्वास्थ्य संस्थाओं की अधोसंरचना का विकास एवं भवन रख-रखाव का कार्य समय-सीमा में किये जाने का संकल्प है. चिकित्सा उपकरण और अस्पताल के फर्नीचर की उपलब्धता, स्वास्थ्य संस्थाओं में जाँच -परीक्षण सेवाओं एवं दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता, डायलिसिस एवं कैंसर की नई उपचार सेवाओं का विकास, ब्लड बैंक एवं ब्लड स्टोरेज का सुदृढ़ीकरण, विशेषज्ञों की कमी को दूर करने के लिये टेली मेडिसिन सेवाओं का विस्तार, रोगियों के लिए हितग्राहीमूलक सेवाओं का विकास, खाद्य सुरक्षा प्रयोगशाला की स्थापना और स्वास्थ्य सेवाओं में जन-भागीदारी को बढ़ावा देने जैसे कार्यों को मिशन मोड में कार्य किया जाएगा।वर्तमान में प्रदेश में 52 जिला चिकित्सालय, 119 सिविल अस्पताल, 356 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 1,266 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं 10 हजार 287 उप स्वास्थ्य केंद्र का एक सशक्त नेटवर्क है. इन्हीं के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ केंद्र एवं प्रदेश शासन की स्वास्‍थ्‍य से जुड़ी विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी दिया जाता है. अभियान के अंतर्गत स्वास्‍थ्‍य संस्थाओं के निर्माण तथा उन्नयन कार्यों और नवीन सेवाओं एवं उपकरणों की पूर्ति के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का बजट बढ़ाया गया है. पिछले वर्ष की तुलना में लगभग चार गुना की बढ़ोत्तरी करते हुए इस वित्तीय वर्ष में स्वास्थ्य बजट बढ़ाकर कुल 43486.83 लाख किया गया है. इस राशि में से विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाओं के अधोसंरचना विकास कुल 14639.69 लाख रुपए की राशि व्यय की जाएगी.सरकारी अस्पतालों में मरीज़ों के समय की बचत के लिए भी राज्य सरकार गम्भीर है. मरीज़ों और उनके परिजनों की सहायता के लिए Help Desk/ सहायता केंद्र की स्थापना भी की जा रही है. इसके अलावा अस्पताल में प्रतीक्षा का समय कम करने के लिये Queue Management System एवं BMI Scanning मशीन की स्थापना भी की जाएगी।प्रदेश में सीटी स्क़ेन, सोनोग्राफ़ी, डिजिटल एवं कंप्यूटराइज्ड एक्स-रे मशीनों जैसे अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं. पैथालोज़ी जांच सेवाओं के अंतर्गत ज़िला चिकित्सालयों में हीमेटोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, हॉर्मोनल जांच, कैंसर मार्कर आदि जैसी उन्नत जांचों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा चुकी है. हब एंड स्पोक मॉडल से सी.बी.सी., किड्नी और लिवर फंक्शन टेस्ट, मधुमेह जांच, सीरम कोलेस्ट्राल आदि जैसी अत्याधुनिक जांचों की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. साथ ही एबीजी मशीन, ईटीओ स्टर्लायजर, एनेस्थेसीआ वर्क स्टेशन, हाइड्रोलिक ओ टी टेबल, ओपीडी किट (स्टेथॉस्कोप, डिजिटल थर्मामीटर, पर्क्यूशन हैमर, एलईडी टॉर्च, मेजरिंग टेप, ओटोस्काप, ट्यूनिंग फोर्क) एवं बीएमआई मशीन जैसे अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं. अस्पताल में मरीज़ों के लिए फ़र्नीचर,चादर, तकियों, गद्दे तथा उनके कवर भी अब नए होंगे.डायलिसिस की सुविधा पाने के लिए प्रतीक्षा न करना पड़े, इसके लिए चरणबद्ध ढंग से सुविधा का विस्तार किया जा रहा है. अब जिला चिकित्सालयों में न्यूनतम 05 डायलिसिस मशीन उपलब्ध कराई जायेंगी तथा इन्हें विश्व स्तरीय मापदंड के अनुरूप विकसित किया जायेगा. साथ ही राज्‍य स्‍तरीय डायलिसिस नेटवर्क के द्वारा रोगियों को फोन के माध्यम से अपॉइन्ट्मेन्ट मिल सकेगा. वर्तमान में प्रदेश में 194 डायलिसिस मशीन उपलब्ध हैं तथा 102 नई मशीन क्रय की जा रही हैं.

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Investigation service stopped in pmch

05.08.2022

पीएमसीएच को विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है। एक छत के नीचे अंतरराष्ट्रीय स्तर की चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था हो रही है। लेकिन, ये भविष्य की बात है। फिलहाल हालत यह है कि राज्य के इस सबसे बड़े अस्पताल के क्लिनिकल पैथोलॉजी विभाग में करीब एक साल से एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी की जांच बंद है। जांच बंद होने का कारण किट खत्म होना बताया जा रहा है।इसकी लिखित जानकारी देने के बावजूद अबतक इन तीनों जांच के लिए किट उपलब्ध नहीं कराई गई है। क्लिनिकल पैथोलॉजी विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन 250 से 275, जबकि सेंट्रल इमरजेंसी में 250 से 300 मरीज जांच कराने आते हैं। यानी प्रतिदिन 500 से अधिक मरीजाें की जांच की जरूरत होती है। चिकित्सकों की मानें तो इनमें 100 से अधिक मरीज एचआईवी और हेपेटाइटिस की जांच कराने वाले हाेते हैं। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आईएस ठाकुर ने बताया कि किट के लिए बीएमएसआईसीएल को लिखा जा चुका है। दवा या किट बीएमएसआईएल ही उपलब्ध कराता है। वहां से नहीं मिलने पर सोचा जाएगा। बगैर टेंडर किए लोकल परचेज नहीं कर सकते हैं।

प्राइवेट में लग रहे ~400
फिलहाल जांच कराने के लिए प्राइवेट में गरीब मरीजों को पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक इन तीनों जांच (पैकेज) के लिए मरीजाें को करीब 400 रुपए खर्च करने पड़ते हैं।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓